दरअसल आपको बता दे की रुड़की नगर निगम बोर्ड की बैठक से पत्रकारो को कवरेज करने पर रुड़की विधायक द्वारा पत्रकारों को सभागार से बाहर निकाला गया था
बोर्ड की मीटिंग समाप्त होने के बाद जब इसे पूरे प्रकरण को लेकर रुड़की नगर निगम मेयर के पति ललित मोहन अग्रवाल से पत्रकारों द्वारा बात की तो उनका कहना था कि क्या आपको को अच्छा नहीं लगा की बोर्ड की बैठक शांति से संपन्न हो गई है
अब इस पर यह सवाल उठता है कि बोर्ड बैठक को मिडिया द्वारा कवरेज किये जाने से अशांति फैलती हैँ
यह बड़ा सवाल है उन्होंने आगे कहा की किसी भी एक्ट में नहीं है कि बोर्ड बैठक में मिडिया कवरेज करे
वही पार्षदो का आरोप है कि विधायक द्वारा आज बोर्ड की बैठक में बड़ी दबंगई दिखाई गयी है ऐसा लग रहा था जेसे की बोर्ड की बैठक मेयर द्वारा ना चलाकर रुड़की विधायक द्वारा चलाई जा रही हों और हमें बोर्ड बैठक में बंदी बनाया गया था
यानी पत्रकार नहीं होंगे तो दबंगई तो होंगी ही साहब क्योके एक्ट अब इनके बाप दादा की जागीर जो बन गयी हैँ
एक तरफ तो मुख्य्मंत्री साहब पत्रकारों के हित की बाते करने का दावा करते हैँ और दूसरी तस्वीर उनके विधायक पत्रकारों से बतमीजी करते हैँ जो समझ से बाहर हैँ क्या ऐसे विधायक को पत्रकारों से बत्तमीजी करने पर दण्डित किया जायेगा या फिर आस पास के पत्रकार भारतीय जनता पार्टी के विधायक का भविष्कार करेंगे
अब सवाल इस बात का हैँ
चौथे स्तम्भ की इस बेइज्जती को पत्रकार किस तरह देखते हैँ ये अपने आप मे बड़ा सवाल होगा या फिर जो पत्रकार भारतीय जनता पार्टी के विधायक की कवरेज करेगा या फिर भविष्कार करेगा ये तो पत्रकार एकता ही बता पायेगी
