घाड टीवी…हरिद्वार वन प्रभाग की
खानपुर रेंज के मानुवास उत्तरी बीट में घायल चीतल को बचाने का प्रयास पर पानी उस वक़्त फिर गया ज़ब दु:खद रूप से चीतल की पूर्व मे ही मृत्यु हो चुकी थी
दरअसल
आज लगभग 7:30 बजे सूचना प्राप्त हुई कि मानुवास उत्तरी बीट, सिकरोड़ा 2A प्रथम बी कंपार्टमेंट के मिलान पर, हलजोरा गांव के चक रोड पर, तीन आवारा कुत्तों द्वारा एक नर चीतल जिसकी (उम्र लगभग 4 वर्ष) थी उसपर पर हमला कर दिया जिसके चलते नर चीतल की मौत हो गयी हलाकि ये आवारा कुत्तों का पहला हमला नहीं था इससे 16 दिन पूर्व मे भी एक चीतल को आवारा कुत्तों ने मार गिराया था
रेंजर और वन कर्मी नहीं है सुरक्षित
जिस तरह कुत्तों द्वारा जंगली जानवरो के साथ वारदात हो रही है और पूर्व मे सिकरोड़ा गांव मे आवारा कुत्तो ने बच्चो पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था तों उसी तर्ज पर रात मे जंगल की रक्षा करने वाले अधिकारी भी कब कुत्तों का शिकार बन जाये उससे पहले हमें सावधान होना पड़ेगा
आखिर क्यों खून के प्यासे बन रहे है आवारा कुत्ते
आस पास की बीट चौकी पर पहरे दारी जरूरी है क्योंके गौ तस्कर पूरी तरिके से सक्रिय हो रहे है और घने जंगल मे गौ कसी को अंजाम दे रहे है यही कारण है कुत्तों के मुँह खून लग चूका है अब उनके सामने जानवर हो या इंसान दोनों ही बराबर है हलाकि रेंजर मोहन सिंह रावत अपनी नौकरी के प्रति ईमानदार छवि रखते है यही कारण है उनकी गौ तस्करों और वन माफियाओ के अंदर दहशत दे रक्खी है
वही सूचना प्राप्त होते ही खानपुर रेंज की टीम — वन आरक्षी श्री राजेश कुमार एवं उपनल कर्मी श्री कल्लू — द्वारा त्वरित रूप से मौके की ओर प्रस्थान किया गया।
दुर्भाग्यवश, वन विभाग की टीम के मौके पर पहुंचने से पूर्व ही चीतल की मृत्यु हो चुकी थी।
रेंज अधिकारी श्री मोहन सिंह एवं रुड़की उप-प्रभाग के नवपदस्थ एसडीओ श्री सुनील बलूनी के पर्यवेक्षण में आगे की कार्यवाही की गई।
चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर से पशु चिकित्सक डॉ. अमित ध्यानी को बुलाया गया। डॉ. ध्यानी द्वारा मौके पर चीतल का परीक्षण एवं पोस्टमार्टम किया गया। साथ ही आवश्यक सैम्पल एकत्र किए गए।
वन विभाग की आगे की कार्यवाही
वन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
इसी क्षेत्र में पूर्व में भी तेंदुए द्वारा एक कुत्ते पर हमला किया गया था, जिसमें एक स्थानीय व्यक्ति भी घायल हुआ था।
वन विभाग द्वारा शीघ्र ही इस समस्या के समाधान के लिए कुत्तों की निगरानी, नियंत्रण एवं ग्रामीणों में जन-जागरूकता के विशेष प्रयास किए जाएंगे, ताकि भविष्य में वन्यजीवों की ऐसी घटनाओं से सुरक्षा हो सके।
