विधायकों को जय शाह बनकर कॉल करने वाले बदमाशों को हरिद्वार पुलिस ने कराई हवालात कि सेर

गृहमंत्री अमित शाह का पुत्र जय शाह बनकर रानीपुर विधायक आदेश चौहान को फोन कर उत्तराखंड सरकार मेंमंत्री बनने का लालच देते हुए पांच लाख रुपये की मांग करने के मामले में  पुलिस-सीआईयू ने दिल्ली से एक व्यक्ति को गिरफ्तरा किया है। एक अन्य आरोपी को ऊधमसिंहनगर पुलिस ने  गिरफ्तार किया गया है।  अभी मुख्य आरोपी पुलिस के हाथ नहीं आ सका है। तीनों आरोपियों ने मिलकर रानीपुर विधायक के अलावा रुद्रपुर विधायक शिव अरोड़ा और भीमताल विधायक सरिता आर्य को भी ऐसा ही फोन किया था, उन्हें मंत्री बनाने का झांसा देकर रुपये मांगे गए थे। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।

हरिद्वार के एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि 14 जनवरी को रानीपुर विधायक आदेश चौहान को फोन कर बात करने वाले शख्स ने खुद को गृहमंत्री अमित शाह का पुत्र जयशाह बनकर बातचीत की थी। ठग के होने का पता चलने पर जब विधायक ने स्पष्ट बातचीत की तो उसने धमकी देते हुए पांच लाख की रंगदारी मांगी थी। रकम न देने पर अभद्रता करते हुए सोशल मीडिया पर उन्हें बदनाम करने की देने की धमकी दी थी। मामला संज्ञान में आते ही तुरंत मुकदमा दर्ज कर सीआईयू-पुलिस की टीमें गठित कर आरोपियों की खोजबीन में लगाई गई। बहादराबाद एसओ नरेश राठौड़ की अगुवाई में बाजार चौकी प्रभारी यशवीर सिंह नेगी, मुख्य आरक्षी देशराज, आरक्षी बलवंत सिंह, सीआईयू के आरक्षी नरेंद्र सुराग मिलने पर दिल्ली पहुंचे।

एसएसपी ने बताया कि सुराग मिलने पर आरोपी प्रियांशु पंत मूल निवासी बेरीनाग बागेश्वर हाल पता ए ब्लॉक मयूर विहार थाना गाजीपुर पूर्वी दिल्ली को मयूर विहार पूर्वी दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के कब्जे से घटना में इस्तेमाल मोबाइल फोन बरामद हुआ। आरोपी उवेश अहमद निवासी मयूर विहार पूर्वी दिल्ली को रुद्रपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसे बी वारंट पर हरिद्वार लाया जाएगा। फरार मुख्य साजिशकर्ता गौरव नाथ निवासी सपेरा बस्ती मयूर विहार पूर्वी दिल्ली की तलाश की जा रही है। नैनीताल और रुद्रपुर कोतवाली में भी इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं।

एसपी सिटी पंकज गैरोला ने बताया कि मुख्य आरोपी गौरवनाथ ने पिछले साल अक्तूबर माह में खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय में सचिव बताकर विधायक से रंगदारी मांगी थी। इस मामले में नासिक से उसे जेल भेजा गया था। आरोपी ने जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद प्रियांशु, उवेश के साथ मिलकर यहां विधायकों को कॉल पैसे वसूलने की योजना बनाई थी। उसकी योजना थी कि पैसे मिलने के बाद तीनों आपस में बांट लिया जाएगा।

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