गुनहगार को गुनहगार कहूंगा तों साहब बुरा मान जायेगे… मासूम का क्या कसूर था साहब

घाड टीवी..भगवानपुर थाना क्षेत्र के मक्खनपुर गांव मे सरकारी अस्पताल के आस पास झोलाछाप डॉक्टरो की मंडी खुली हुई है जोकि बड़े डॉक्टर के नेतृत्व मे लगती है
दरअसल दो दिन पहले सरकारी अस्पताल के से कुछ दुरी पर नाले के कीचड से सना एक नवजात शिशु का शव मिला था जिसकी डिलीवरी किसी प्राइवेट अस्पताल मे होने की आशंका जताई जा रही है जोकि किसी सरकार से जुड़े अधिकारी की सह पर चलाये जा रहे है जिसकी जाँच होनी चाहिये
सरकारी अस्पताल मे काबलियत है या प्राइवेट अस्पतालो मे ज्यादा काबलियत है……
सरकारी अस्पतालो की आशाए प्राइवेट डॉक्टरो से मिली होती है जिससे अच्छा खासा कमीशन हाथ लग जाता है रही बात बड़े डॉक्टरो की तों बंद लिभाफे कार्यवाही के सामने आकर खड़ा हो जाता है जिससे कोई कार्यवाही नहीं हो पाती यही कारण है सरकारी मे डिलीवरी फ्री और प्राइवेट अस्पतालो मे 15 से 20 हजार रूपये फिर चाहे वो गरीब हो या अमीर मरे या जिये प्राइवेट झोलाछाप डॉक्टरो को कोई फर्क नहीं पड़ता
आप को बता दे की एल्मेक्स? अपोलो?मेडिकेयर डीपीएनसी? आयुष्मान ग्लोबल पारस फैमिली जच्चा बच्चा और जन जीवन हॉस्पिटल जिनपे डिग्री एमबीबीएस एम डी की मिलेगी जिन्होंने बोर्ड पर बाकायदा लिखी हुई है मगर हरिद्वार स्वास्थ्य विभाग लिफाफो के सामने नसमस्तक हो जाते है फिर चाहे हॉस्पिटलो की आड़ मे किसी तरह का धंधा करें
अब सवाल इस बात का है आखिर इतना बड़ा हादसा हो गया और स्वास्थ्य विभाग चुप्पी लगाये बैठा है जबकि भगवानपुर पुलिस की जितनी भी तारीफ करे वो कम है
भगवानपुर मे खुले हॉस्पिटल मे जिनकी डिग्री लगी है वो कही और हॉस्पिटल चला रहे है जबकि जिनके पास डिग्री नहीं है वो हॉस्पिटल मे बड़े बड़े कारनामें कर रहे है ऐसे मे स्वास्थ्य विभाग डिग्रीयो को बैन कर कार्यवाही करे ताकि भूर्ण हत्याओ को रोका जा सके
हलाकि कुछ हॉस्पिटल ऐसे है जिनपर कई मौते हो चुकी है मगर आज तक स्वास्थ्य विभाग ने कोई कार्यवाही नहीं जिसमे मुख्य केस खेलपुर से जुडा था जिसमे जच्चा की मौत हो गयी थी मगर वह मामला दबा दिया गया था जोकि बहुत ही शर्मनाक था

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