अकरम राणा
कहते है गरीब कितना ही क्यों ना चिल्लाये उसकी आवाज वही दफन हो जाती है यही कहावत खानपुर वन विभाग मे देखी जा रही है जहाँ सालो से वनो कि सेवा करने वाले चौकीदारों के घरों मे खाने के लाले पड़ रहे है पिता बच्चों कि फीस तक स्कूल मे जमा नहीं कर पर रहे है इसे भाजपा शासित राज्य का दुर्भाग्य कहे या फिर वन अधिकारियो कि सोची समझी साजिश जो दिन रात जंगल कि सेवा मे लगे चौकीदारों का मेहनताना भी नहीं मिल पर रहा है दिन पर दिन हाल बद से बदतर होते जा रहे है घरो मे खाने के लाले पड़े है जो वन विभाग का दुर्भाग्य है जिसमे मजदूरों का शोषण किया जा रहा है
आप को बता दे ये तस्वीर खानपुर वन विभाग कि है जहाँ लगातार वन अधिकारियों कि सैलरी वक्त पर आ जाती है और गरीब मजदूर जोकि वनो कि लगातार सेवा कर रहे है उनकी सैलरी सालो से नहीं आयी जोकि वन विभाग के सौतेले व्यवहार कि कैद मे बंदी बनकर रह गये
लगभग कई हजार बिघो मे फैले खानपुर रेंज के जंगल कि रक्षा करने चौकीदार आज भी अपने आप से लड़ रहे है मगर आज घाड टीवी वन चौकीदारों कि आवाज को बुलंद करने मे कमर कस ली जब तक वन चौकीदारों कि तनख्वाह नहीं मिलती तब आवाज उठाता रहेगा
हम ऐसे युग कि बात करने जा रहे है जहाँ छोटे मुलाजिमो कि फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है सालो से खून के आंसू रो रहे वन चौकीदारो का दुःख कोई महसूस नहीं कर पा रहा है या फिर दुःख समझना नहीं चाहता अगर ये वन अधिकारियो के साथ होता तो कभी कि स्ट्राइक हो जाती जोकि अपने आप मे एक बड़ा सवाल है
अब इसे बड़े ऑफिसरो कि हिटलर शाही कहे या फिर कुछ और जोकि अपने वन चौकीदारों को तनख्वाह के लिये तड़फा रहे है जोकि वन विभाग का दुर्भाग्य है
हलाकि सरकार का 24 घंटे कार्य कराने का कोई जियो नहीं है मगर खानपुर रैंज कि अंधेर गर्दी कहे या हिटलर शाही वन चौकीदारों को एक तरिके से बंधक बनाकर 24 घंटे कार्य कराया जाता है
हमने आज तक फिल्मो मे ये सीन देखे है जहाँ अंग्रेज बंदरगाहो पर मजदूरों से पीट पीट कर कार्य कराते थे जोकि दिलीप कुमार स्टारर फ़िल्म क्रांति मे देखा गया था जोकि बहुत ही खौफनाक और डरावना होता था मगर आज रियल लाइफ मे भी खानपुर रैंज मे देखा जा रहा है जहा मजदूरों से 24 घंटे हिटलर शाही से कार्य कराया जाता है
