उत्तरकाशी
जनपद में फायर सीजन को लेकर वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। जंगलों में आग लगने की घटनाओं को रोकने और उन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ग्राम पंचायतों से लेकर आम जनता तक को जागरूक किया जा रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) डीपी बलोनी और गंगोत्री नेशनल पार्क के उपनिदेशक ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर बताया कि फायर सीजन के दौरान जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे वन्यजीवों, पर्यावरण और स्थानीय लोगों को भारी नुकसान होता है। गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिनमें ग्रामीणों को बताया जाएगा कि जंगलों में आग लगने के कारण क्या हो सकते हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है। पूरे जनपद में तैनात वनकर्मी और फॉरेस्ट गार्ड जंगलों पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं। आग पर तुरंत नियंत्रण पाने के लिए मोबाइल ऐप और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आग लगने की घटनाओं का तुरंत पता लगाया जा सके। वन विभाग स्थानीय निवासियों, ग्राम पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों को भी इस मुहिम में जोड़ रहा है ताकि आग लगने की घटनाओं को रोका जा सके।
डीएफओ डीपी बलोनी ने बताया कि उत्तरकाशी का 80 प्रतिशत क्षेत्र खड़ी पहाड़ियों से भरा हुआ है। ऐसे में यदि किसी ऊंचाई वाले इलाके में आग लग जाती है, तो उस पर काबू पाना बेहद कठिन हो जाता है। इसलिए, आग को फैलने से रोकना सबसे जरूरी है।जनपद में 600 से अधिक कर्मचारी, वन कर्मी और फॉरेस्ट गार्ड तैनात किए गए हैं। उत्तरकाशी का 80 प्रतिशत भाग खड़े पहाड़ों से घिरा हुआ है, जहां एक बार आग लगने के बाद उसे नियंत्रित करना बेहद कठिन हो जाता है। ऐसे में वन विभाग द्वारा लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि आग की घटनाओं को रोका जा सके।
गंगोत्री नेशनल पार्क के उपनिदेशक हरीश नेगी ने कहा कि वन विभाग के कर्मचारी 24 घंटे सतर्क हैं और किसी भी आग लगने की सूचना पर तुरंत कार्रवाई कर रहे हैं। वन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि अगर कहीं भी जंगल में धुआं या आग लगती हुई दिखे, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें। साथ ही, जंगलों में अनावश्यक रूप से आग न जलाएं और कूड़ा-कचरा न फेंकें, जिससे आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। वन विभाग का यह प्रयास है कि इस फायर सीजन में जंगलों को आग से बचाया जा सके और पर्यावरण को सुरक्षित रखा जाए। सभी की सतर्कता और सहयोग से ही यह संभव हो सकेगा।
