साहब मिडिया से दूरी की क्या थी मजबूरी फीकी रही शपथ समरोह की महफ़िल

मीडिया से दूरी आखिर क्या थी मजबूरी कही दाल मे कुछ काला था या पुरी दाल ही काली थी
6 फ़रवरी यानी आज मीडिया को एक सूचना मिली जिसमे शाम 4 बजे शपथ समारोह का कार्यक्रम आयोजन किया जाना था मगर ऐसा क्या हुआ जो 9 सभासद और एक अध्यक्ष ने चंद मिनटों मे ही शपथ पुरी कर ली जबकि निर्धारित समयानुसार शपथ ग्रहण करनी चाहिये थी
आप को बतादे अगर वास्तव मे भारतीय जनता पार्टी जीत हाशिल करती तों यहां का नजारा देखने काबिल होता मगर कांग्रेस विधायक ममता राकेश अभिषेक राकेश राव फरमुद आदि चंद लोगों की उपस्थिति ने शपथ समारोह की खिचड़ी बना डाली जिसमे कुछ लोग मायूस नजर आये
अब सवाल इस बात का हैँ मीडिया से दूरी बनाने का मुख्य कारण क्या था क्या जल्द बाजी मे ऐसी कौन सी खिचड़ी बनाई जा रही थी जो जीत मे अहम भूमिका निभाने वाले लोगों को ख़ुशी मे शामिल होने से दो चार होना पड़ा या फिर कुछ सभासद ऐसे थे जो ठीक से शपथ समारोह मे शपथ ग्रहण भी नहीं कर पाते सवाल बहुत बड़ा हैँ मगर जवाब जनता को ही देना होगा

नगर पंचायत बोर्ड ने अपनेअपने कार्यों की भागदौड़ तों संभाल ली मगर क्या हलवा? पुरी?दाल?चावल? बिरयानी?पकोड़िया चिकन पकोड़ो और मदिरे मे खर्च हुए रुपयों को सूत समेत पूरा किया जायेगा या फिर उन्हें भूल जनहित के लिये कार्य किया जायेगा सवाल तों बड़ा हैँ जनाब मगर अबकी बार विपक्ष मजबूत हैँ और हर कदम पर जवाब देने का कार्य किया जायेगा
ये चुनावी मेला भी अजीब हैँ यहां हर वह समान फ्री मिलता हैँ जिसका मतदाताओं को जरूरत होती हैँ हर रोज शाम के वक़्त होटलों पर दावते शराब की दुकानों पर शराब और घर मे 1000 हजार रूपये मगर मेला खत्म होते ही मानो लोग प्रताशियों के मुँह ताकतें रह जाते हैँ मगर प्रत्याशी भी पीछे मुड़कर नहीं देख पाते जो बड़ी हास्य दुःखद घटना होती हैँ

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