भगवानपुर विद्युत विभाग की कमिया कहे तो ज्यादा बेहतर होगा हल्की सी हवा या बारिश होते ही बिजली गुल हो जाती है जबकि लाईनों की दुरूस्त करने के लिये विधुत विभाग पर भारी भरकम बजट आता है मगर बजट को कोन हजम करता है वो तो संबंधित अधिकारी ही सही बता सकते है
हालाकि सूत्रों द्वारा बताया जाता है की गांव वालों को गुमराह कर बिजली को चोरी छुपे उद्योगीग क्षेत्र की कंपनियों को बेचा जाता है जिसकी चर्चा पहले भी कई बार हो चुकी है मगर विद्युत विभाग की तानाशाही सिर्फ ग्रामीणों पर किसानों पर ही चलती है जब चाहा बिजली का कनेक्शन काट दिया हालाकि बिजली कटौती पर पहले भी कई बार विरोध हो चुका है मगर ग्रामिणो की पीड़ा किसी ने नहीं समझी क्योंकि भ्रष्टाचार का जन्म यही से शुरू होता है

बिजली गुल पर हमेशा जन प्रतिनिधि पीछे रहे है क्योंकि ग्रामीणों और किसानों की पीड़ा का इलाज किसी के पास नही है जोकि किसानों ग्रामीणों का दुर्भाग्य है किसान का बिल 2000 हजार और कंपनियों का बिल 200000 बराबर है दो हजार पर किसानों के कनेक्शन काट दिया जाता है जबकि कंपनियों का दो लाख का बिल होने पर भी उन्हें सम्मान दिया जाता है
वही विद्युत विभाग बताए पिछले 5 सालो में विद्युत विभाग के पास लाइन दुरुस्त करने के लिए कितना बजट आया है और कहा कहा उसका उपयोग हुआ है अगर ये साबित हो जाता है तो विद्युत विभाग के भ्रष्टाचार की पोल खुल जायेगी जो एक तरीके से सच सामने आना जरूरी है हम लोग टैक्स देते है जिसका बजट तैयार होकर हमारे विकास विश्वास की नीव तैयार होती है
हालाकि उद्योगिग क्षेत्र के सिकंदरपुर ,भैसवाल ,रायपुर ,सिसौना ,छाप्पुर ,शेर अफगानपुर आदि गांव बिजली गुल होने की पीड़ा सहते रहते है हालाकि इस प्रकरण की जांच होनी चाहिए