हिचकोले खाता सहकारी समितियो का चुनाव

सहकारी समितियों में चुनाव स्थगित करने के आदेश उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए हैं। मामले में अगली सुनवाई 27 फरवरी तय की गई है। वहीं आदेश आने से पहले निदेशकों के चुनाव समितियों में संपन्न हो गए लेकिन जीते हुए निदेशकों को प्रमाण पत्र न्यायालय के अग्रिम आदेश के बाद देने की बात अधिकारियों द्वारा उन्हें बताई गई है।

सहकारी समितियों के चुनाव इस बार लगातार हिचकोले खाता दिख रहा है। हरिद्वार जिले की सहकारी समितियों में 24 फरवरी को निदेशकों और 25 फरवरी को अध्यक्षों के चुनाव होने की तिथि निर्वाचन द्वारा जारी की गई थी लेकिन उससे पूर्व पनियाला निवासी अखलाक की रिट के बाद जहां 22 फरवरी को न्यायालय ने जिले की छह समितियों में चुनाव स्थगित करने के आदेश दिए थे। वहीं बाकी समितियों में आज निदेशकों के चुनाव हुए लेकिन आज न्यायालय ने मांगेराम सिरोही बनाम सरकार व अन्य में सुनवाई करते हुए समितियों के स्थगन के आदेश पारित किए हैं मामले में अग्रिम सुनवाई 27 फरवरी को होगी। वहीं यह आदेश आने के तक सहकारी समितियों में निदेशक पद पर मतदान प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी ऐसे में चुनाव के बाद मतगणना की गई लेकिन फिलहाल विजई निदेशकों को प्रमाण पत्र नहीं दिए गए हैं और 25 फरवरी को होने वाले चुनाव भी नहीं होंगे। मामले में अगली सुनवाई 27 फरवरी को है उसके बाद न्यायालय के आदेश के बाद ही चुनाव में अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

जानिए क्यों हुए चुनाव स्थगित..

। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य में आज सोमवार 24 फरवरी को हो रहे सहकारी समितियों के चुनाव के मामले पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ती मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ती आशीष नैथानी की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार से कहा है कि चुनाव एकलपीठ के आदेश के अनुसार ही हों। बता दें कि इस मामले में आज एकलपीठ के आदेश के खिलाफ सोसाइटी की तरफ विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी गयी, जिसमें कहा गया कि सहकारी समितियों का चुनाव कराने हेतु राज्य सरकार ने इसमे कुछ संसोधन किए है, उसको भी लागू किया जाय और उसी के अनुसार चुनाव कराएं।

आपत्ति व्यक्त करते हुए आरटीआई एक्टिविस्ट भुवन पोखरिया व कई अन्य याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि कॉपरेटिव के चुनाव पूर्व के नियमों के तहत ही कराए जाय। राज्य सरकार ने चुनाव कार्यक्रम घोषित करने के बाद नियमावली को संशोधित किया है। वह अपने आप मे गलत है, जबकि चुनाव कराने की प्रक्रिया दिसंबर माह से प्राररम्भ हो चुकी है, अब इस मामले में राज्य सरकार संशोधन करा रही है, जो नियम विरुद्ध है। राज्य सरकार ने इसमे संशोधन करके उन लोगों को वोट का अधिकार दे दिया है, जो सेवानिवृत्त है या इस कमेटी के सदस्य नहीं है। नियम ये कहता है कि वही समिति के सदस्यों के का चुनाव में प्रतिभाग कर पाएंगे जो तीन साल से इसके सदस्य रहते आए।

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