दो वन्य जीव तस्करों को 2 भालू पित्त?3 जिंदा कारतूस12 बोर? सहित कालसी थाना क्षेत्र से किया गिरफ्तार। Latest News

:देश में वन्य जीव अंगों कीअवैध तस्करी में लिप्त तस्करों की अवैध गतिविधियों में रोकथाम व धरपकड़ हेतु पुलिस महानिदेशक दीपक सेठ उत्तराखंड पुलिस द्वारा एसटीएफ को कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए थे जिसके अनुक्रम में एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर द्वारा अपनी टीमों को स्पष्ट निर्देशित किया गया है की वन्य जीवों की तस्करी में संलिप्त प्रत्येक तस्कर की कुंडली तैयार कर उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए इसी क्रम मे उत्तराखंड एसटीएफ को डब्ल्यूसीसीबी दिल्ली को वन्य जीव तस्करी की सूचना मिलने पर 25, तारीख को देहरादून के कालसी क्षेत्र से दो वन्य जीव तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से दो अदद भालू पित जिनका वजन ( 19 ग्राम व 8 ग्राम) व तीन जिंदा कारतूस 12 बोर बरामद किए गए पूरे मामले में एसएसपी एसटीएफ द्वारा जानकारी देतै हुए बताया गया कि उत्तराखंड एसटीएफ को डब्ल्यूसीसीबी दिल्ली से सूचना मिली की देहरादून के चकराता कालसी में वन्य जीव जंतुओं के अंगों की अवैध तस्करी हो रही है जिसमे उत्तराखंड एसटीएफ द्वारा अपने स्थानीय सूत्रों से मैनुवली डवलप किया गया जिस पर 25 तारीख को कालसी क्षेत्र में जोहड़ी कालसी चकराता मार्ग पर दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है दोनों के कब्जे से 2 भालू पित व 3 जिंदा कारतूस 12 बोर
बरामद किए गए उक्त भालू पित को वन्यजीव जंतु संरक्षण अधिनियम की पहली अनुसूची में रखा गया है इसका शिकार करना एक गंभीर अपराध है पकड़े गए तस्करों के विरुद्ध थाना कालसी देहरादून में वन्य जीव अधि0 (वाइल्ड लाइफ एक्ट) एवम आमर्श एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया है वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर द्वारा बताया गया कि अभियुक्त से पूछताछ में मिली जानकारी के अनुसार एसटीएस द्वारा इस मामले में गहनता से छानबीन की जा रही है और यदि इस मामले में अन्य किसी व्यक्ति की संलिप्ता मिलती हैं तो उसके विरुद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी वन विभाग से मिली जानकारी की जा रही है एसएसपी एसटीएफ ने जनता से अपील की है कि वन्य जीव तस्करी करने वाले तस्करों के विरुद्ध कार्यवाही हेतु तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन या एसटीएफ उत्तराखंड को सूचित करें उत्तराखंड एसटीएफ आगे भी वन्य जीव तस्करों के विरुद्ध कार्यवाही करती रहेगी ताकि सीधे साधे बेजुबान जानवरों के शिकार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

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